बरसों बाद मिले थे हम, मगर हाल-ए-दिल कह न सके। आंखों में हजारों बातें थीं, मगर एक लफ़्ज़ भी बोल न सके।
चंद मिनटों की वो मुलाकात, सदियों की याद दे गई। जो दर्द वक्त भी न मिटा सका, वो फिर से ताज़ा कर गई।
वो सामने थी, मगर अपनी नहीं थी, मैं पास था, मगर करीब नहीं था। कुछ पल की मुलाकात में ही समझ गया, जो अधूरी कहानी थी, वो अब भी खत्म नहीं हुई थी।
न उसने मेरे दुख पूछे, न मैं उसके हाल जान सका। वक्त ने जो दूरी लिख दी थी, उसे चंद लम्हों में मिटा न सका।
अब कभी-कभी उसकी याद यूँ चली आती है, जैसे पुरानी किताब से कोई सूखा गुलाब गिर जाता है। न उसे पाने की उम्मीद है, न उसे भूल पाने का हौसला।
मार्मिक शायरी
मिले भी तो अजनबियों की तरह, बिछड़े भी तो अजनबियों की तरह। मगर दिल आज भी उसे याद करता है, अपनों की तरह...
वो कुछ मिनटों की मुलाकात नहीं थी, मेरी अधूरी जिंदगी का एक पूरा अध्याय थी। 💔🥀
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